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Bihar Crime News: 12 साल पुराने चंदन हत्याकांड में पत्नी और प्रेमी को उम्रकैद, दोनों पर 75-75 हजार का जुर्माना

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Danapur News | Bihar Crime News | दानापुर कोर्ट ने 12 साल पुराने चंदन हत्याकांड में पत्नी अनिशा कुमारी और पप्पू कुमार को उम्रकैद की सजा सुनाई, दोनों पर 75-75 हजार रुपये जुर्माना।

दानापुर, 8 अगस्त। करीब 12 साल से अदालत में चल रहे चंदन हत्याकांड में आखिरकार फैसला आ गया। दानापुर व्यवहार न्यायालय ने नौबतपुर थाना क्षेत्र के रेगनियाबा गांव निवासी चंदन कुमार की हत्या के मामले में उसकी पत्नी अनिशा कुमारी और पप्पू कुमार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों दोषियों पर 75-75 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माने की राशि मृतक के पिता को देने का आदेश दिया गया है।

मामला वर्ष 2014 का है और इसकी शुरुआत वैवाहिक रिश्ते में पैदा हुए विवाद से हुई थी। अभियोजन के अनुसार, चंदन की पत्नी अनिशा के पप्पू कुमार से कथित संबंध थे। पति को इस रिश्ते की जानकारी होने के बाद विवाद बढ़ा और मामला पंचायत तक पहुंचा। पंचायत में समझौते की कोशिश हुई, लेकिन इसके अगले ही दिन चंदन की हत्या कर दी गई।

दानापुर व्यवहार न्यायालय के एडीजे-1 कुमार गुंजन की अदालत में मामले की सुनवाई के बाद अनिशा कुमारी और पप्पू कुमार को हत्या के मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई। वहीं, मामले में नामजद अनिशा के पिता उमेर यादव और भाई भीम यादव को पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण पहले ही बरी किया जा चुका है।

2008 में हुई थी चंदन और अनिशा की शादी

मामले की पृष्ठभूमि करीब छह साल पहले से जुड़ी है। नौबतपुर के रेगनियाबा गांव निवासी चंदन कुमार की शादी वर्ष 2008 में दुल्हिन बाजार क्षेत्र के सिंघाड़ कोपा निवासी उमेर यादव की बेटी अनिशा कुमारी से हुई थी।

शादी के शुरुआती वर्षों में सबकुछ सामान्य रहा, लेकिन बाद में पति-पत्नी के रिश्ते में विवाद की स्थिति पैदा होने लगी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, इसी दौरान अनिशा और नौबतपुर निवासी पप्पू कुमार के बीच कथित प्रेम संबंध की बात सामने आई।

चंदन को जब इस रिश्ते की जानकारी मिली तो उसने इसका विरोध किया। परिवार में विवाद बढ़ने लगा और मामला धीरे-धीरे गांव के लोगों तक पहुंच गया।

रिश्ते के विवाद के बाद बैठी पंचायत

मामले में बताया गया कि चंदन ने अपनी पत्नी और पप्पू कुमार को लेकर आपत्ति जताई थी। विवाद बढ़ने के बाद दोनों पक्षों के बीच तनाव की स्थिति बनी। परिवार और ग्रामीण स्तर पर मामले को सुलझाने की कोशिश की गई और पंचायत बुलाई गई।

13 जुलाई 2014 को पंचायत में समझौते की बात सामने आई। आरोपों के अनुसार, पप्पू कुमार ने अनिशा से संबंध खत्म करने की बात स्वीकार की थी। परिवार और ग्रामीणों को उम्मीद थी कि विवाद यहीं समाप्त हो जाएगा।

लेकिन इसके अगले ही दिन घटनाक्रम ने ऐसा मोड़ लिया, जिसने पूरे मामले को हत्या के मुकदमे में बदल दिया।

समझौते के अगले दिन चंदन की मौत

14 जुलाई 2014 को चंदन की हत्या कर दी गई। मृतक के पिता सुदर्शन प्रसाद की ओर से पुलिस को दिए गए आवेदन में आरोप लगाया गया था कि अनिशा और पप्पू कुमार समेत अन्य लोगों ने चंदन के साथ मारपीट की और उसकी हत्या कर दी।

पुलिस के सामने एक और गंभीर आरोप यह था कि हत्या के बाद घटना को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई। कमरे पर बाहर से ताला लगाए जाने और आरोपितों के वहां से चले जाने की बात भी प्राथमिकी में कही गई थी।

बेटे की मौत की सूचना मिलने के बाद चंदन के पिता ने पुलिस से संपर्क किया। इसके बाद नौबतपुर थाने में अनिशा कुमारी, पप्पू कुमार, उमेर यादव और भीम यादव के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई।

लंबी जांच और सुनवाई के बाद आया फैसला

प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच की और केस अदालत तक पहुंचा। इसके बाद करीब 12 वर्षों तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद अब अदालत ने अपना फैसला सुनाया है।

अदालत ने अनिशा कुमारी और पप्पू कुमार को चंदन की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा दी। दोनों पर 75-75 हजार रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया गया। अदालत ने जुर्माने की राशि मृतक के पिता को देने का निर्देश दिया है।

इस मामले में अनिशा के पिता उमेर यादव और भाई भीम यादव भी आरोपी बनाए गए थे, लेकिन उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण उन्हें पहले ही अदालत से राहत मिल चुकी है।

12 साल बाद परिवार को मिला कानूनी फैसला

चंदन की हत्या के बाद शुरू हुई कानूनी लड़ाई को फैसला आने में लगभग 12 वर्ष लग गए। इस दौरान मामला जांच, आरोप और अदालत में सुनवाई के कई चरणों से गुजरा।

अदालत के फैसले के बाद अब मामले में दो दोषियों को उम्रकैद की सजा मिली है, जबकि दो अन्य आरोपित साक्ष्य के अभाव में बरी हो चुके हैं। इस तरह लंबे समय से चल रहे इस हत्याकांड की न्यायिक प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण पड़ाव आया है।

यह मामला इस बात की भी गंभीर तस्वीर सामने रखता है कि वैवाहिक विवाद और निजी रिश्तों को लेकर पैदा हुआ तनाव किस तरह हिंसक घटना में बदल सकता है। पंचायत के जरिए विवाद खत्म करने की कोशिश के बावजूद अगले ही दिन हत्या हो जाना पूरे घटनाक्रम को और गंभीर बना देता है।

अदालत का फैसला हालांकि उपलब्ध साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर आया है। 12 वर्ष पुराने इस मामले में अब पत्नी अनिशा कुमारी और पप्पू कुमार को शेष जीवन कारावास की सजा भुगतनी होगी, जबकि अन्य दो आरोपितों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर उन्हें बरी किया जा चुका है।

12 साल बाद फैसला, लेकिन कहानी रिश्तों के टूटने से शुरू हुई थी

चंदन हत्याकांड केवल एक आपराधिक मुकदमा नहीं रहा, बल्कि इसके पीछे टूटते वैवाहिक रिश्ते, कथित प्रेम संबंध और परिवारों के बीच बढ़ते विवाद की पूरी कहानी जुड़ी रही। वर्ष 2008 में हुई शादी के कुछ वर्षों बाद विवाद सामने आया। कथित प्रेम संबंध को लेकर पति-पत्नी के बीच तनाव बढ़ा और मामला ग्रामीण पंचायत तक पहुंच गया।

13 जुलाई 2014 को समझौते की कोशिश हुई। लेकिन अगले ही दिन चंदन की हत्या ने पूरे घटनाक्रम को बदल दिया। इसके बाद परिवार को न्याय के लिए लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ा।

अब अदालत ने दो आरोपितों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इस फैसले का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अदालत ने एक तरफ दोष सिद्ध होने पर दो लोगों को सजा दी, वहीं दूसरी तरफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर दो अन्य आरोपितों को बरी भी किया। यही न्यायिक प्रक्रिया का मूल आधार है—आरोप नहीं, बल्कि अदालत के सामने साबित हुए साक्ष्य के आधार पर फैसला।

12 साल पुराने इस मामले का फैसला एक परिवार के लंबे इंतजार का अंत जरूर है, लेकिन चंदन की मौत से जुड़ा दर्द उसके परिजनों के लिए कभी खत्म नहीं होगा।

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